मिस्ड कॉल नंबर: 84079 70909
गंगोत्री

उत्तराखण्ड के चार धामों में से एक पवित्र धाम - गंगोत्री

उत्तराखण्ड के जिला उत्तरकाशी में बसे पवित्र स्थाल गंगोत्री गंगा नदी का उद्गम स्थान है। यहां गंगाजी का मंदिर है। जो समुद्र तल से 3042 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। भागीरथी के दाहिने ओर का परिवेश अत्यंत आकर्षक एवं मनोहारी है। यह स्थान उत्तरकाशी से 100 किमी की दूरी पर स्थित है। गंगा मैया के मंदिर का निर्माण गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा द्वारा 18वीं शताब्दी के शुरूआत में किया गया था। वर्तमान मंदिर का पुननिर्माण जयपुर के राजघराने द्वारा किया गया था। प्रत्येक वर्ष मई से अक्टूबर के महीनों के बीच पतित पावनी गंगा मैंया के दर्शन करने के लिए लाखों श्रद्धालु तीर्थयात्री यहां आते है।

गंगोत्री शहर धीरे-धीरे उस मंदिर के इर्द-गिर्द विकसित हुआ जिसका इतिहास 700 वर्ष पुराना हैं। पहले चारधामों की तीर्थयात्रा पैदल हुआ करती थी तथा उन दिनों इसकी चढ़ाई दुर्गम थी। वर्ष 1980 के दशक में गंगोत्री की सड़क बनी। प्राचीन काल में यहां मंदिर नहीं था। भागीरथी शिला के निकट एक मंच था जहां यात्रा मौसम के तीन-चार महीनों के लिये देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी जाती थी। इन मूर्तियों को गांवों के विभिन्न मंदिरों जैसे श्याम प्रयाग, गंगा प्रयाग, धराली तथा मुखबा आदि गावों से लाया जाता था। जिन्हें यात्रा मौसम के बाद फिर उन्हीं गांवों में लौटा दिया जाता था। गंगोत्री से निकलने वाली पतित पावनी गंगा धारा देवप्रयाग से होकर हरिद्वार पहुंचती है। वर्षभर हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु आकर पुण्य कमाते हैं। हरिद्वार से गंगा कई महत्वपूर्ण शहरों को छूते हुए इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है इलहाबाद व हरिद्वार में 12 साल बाद कुम्भ मेला लगता है। इन्हीं पवित्र स्थानों पर 6 वर्ष में एक बार अर्द्धकुम्भ का मेला भी आयोजित किया जाता है। मन्दिर के आसपास अनेक आश्रम हैं, यहां पर यात्रियों के ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था रहती है। पास में ही गौरीकुण्ड व केदारकुण्ड हैं। यहां से अठारह किलोमीटर की दूरी पर गौमुख है जो भारत की पवित्रतम कही जाने वाली गंगा नदी का उद्गम स्थल है। यहां से शिवलिंग, भागीरथी, सुदर्शन, थेलू व केदारडोम की बर्फ से ढकी सुन्दर चोटियां दिखाई पड़ती हैं। यह वह स्थान है जहां गंगा सबसे पहले हिमखण्ड के गर्भ से बाहर निकलती है और आरम्भ करती है अपनी महायात्रा।