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देव भूमि के प्रयाग

देव भूमि के प्रयाग

यूं तो देव भूमि उत्तराखंड में अनेकों प्रयाग (नदियों के मिलन स्थल/संगम) हैं। इन सबका अपना महत्व, मान्यता और आराध्य रूप है। किन्तु ‘पंच प्रयाग’ स्वयं में अनूठे हैं। उनकी महिमा और उनकी अपनी कथाएँ हैं। ये पंच प्रयाग हैं, अब विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग हैं। नदियों के सगंम को ही प्रयाग कहा जाता है। भारत में नदियों के संगम को बहुत ही पवित्र माना जाता है। विशेष रूप से इसलिए कि नदियां देवी का रूप मानी जाती हैं। इलाहाबाद में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम के बाद गढ़वाल-हिमालय के संगमों को सबसे पवित्र माना जाता है। क्योंकि गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों का यही उद्गम स्थल है। जिन जगहों पर इनका संगम होता है उन्हें प्रमुख तीर्थ माना जाता है। हम क्रमश: एक-एक कर प्रयागों की चर्चा करते हैं। सबसे पहले बात करते हैं विष्णुप्रयाग की।