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चाँदपुर गढ़

गढ़वाल के गढ़ - चाँदपुर गढ़

चाँदपुर गढ़ चमोली जिले में आदिबद्री के निकट एक आकर्षण केन्द्र है। गढ़वाल की ऐतिहासिक गाथाओं और कथाओं में इन किलों का विशेष संबंध है। गढ़वाल में 52 गढ़ों का अध्याय बहुत ही रोमांचक रहा है। इन्हीं 52 गढ़ों में से चाँदपुर गढ़ काफी लोकप्रिय रहा है। गढ़वाल के प्रारम्भिक इतिहास में कत्यूरी राजवंशों की विशेष चर्चा मिलती है। पश्चिमी राजवंश नेपाल नरेश अशोकचल्ल ने 1191 ई0 में उत्तराखण्ड पर आक्रमण कर अधिकतर क्षेत्र को अपने राज्य में सम्मलित किया। लेकिन यह शासन ज्यादा समय के लिए नहीं चल सका। चाँदपुर में राजा कनकपाल ने परमार वंश की स्थापना की। परमार वंश के सर्वप्रथम नरेश कार्तिकेयपुरी नरेशों के सामंत रहे। इस वंश के सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली राजा अजयपाल ने चाँदपुर गढ़ी से अपनी राजधानी पहले देवलगढ़ और फिर श्रीनगर में स्थापित की। इतिहास के अनुसार कत्यूरी राजाओं द्वारा जोशीमठ से अपना शासन किया और 11वीं शताब्दी के उपरांत वे अल्मोड़ा चले गए।

तत्पश्चात उनके गढ़वाल से हटने के बाद गढ़वाल में अनेक छोटे-छोटे गढ़ों का उदय प्रारम्भ हुआ, जिनमें परमारवंश के शक्तिशाली राजा कनकपाल जिन्हें इस वंश का संस्थापक माना जाता है। उसने चांदपुर भानु प्रताप की पुत्री से विवाह किया और स्वयं यहां का गढ़पती बन गया। राजा कनकपाल ने आदिबद्री (चमोली जिले में स्थित) के निकट चांदपुर स्थित अपना गढ़ स्थापित किया। जो आगे चलकर चाँदपुर गढ़ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह स्थल सड़क से करीब 1 किमी की ऊंचाई पर स्थित है। इस महल में आज भी अनेक प्रकार के हस्तलिपि, कलाचित्र अवशेष हैं। यहां विष्णु का मंदिर भी स्थापित है। महल की संरचना अवशेष के साथ ही रसोई, स्नानघर व पूजाघर भी है। स्थानीय लोगों के अनुसार महल के एक हिस्से में सुरंग है, जो करीब 500 फीट नीचे है जो आगे जाकर नदी के किनारे मिलती है।