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बाबा केदारनाथ मन्दिर

बाबा केदारनाथ मन्दिर

केदारनाथ मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य, रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है। हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। केदारनाथ मंदिर (3,562 मीटर) की ऊँचाई पर स्थित है। इसे 1000 वर्ष से भी पूर्व का निर्मित माना जाता है। यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मन्दिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्य ही दर्शन के लिए खोला जाता है। पत्थरों व कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पाण्डव वंश के जनमेजय ने कराया था। यहाँ स्थित स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है।

उत्तराखण्ड में बद्रीनाथ और केदारनाथ-ये दो प्रधान तीर्थ हैं। केदारनाथ के संबंध में लिखा है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन किये बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है, उसकी यात्रा निष्फल जाती है। केदारनाथ सहित नर-नारायण-मूर्ति के दर्शन का फल समस्त पापों के नाश व जीवन मुक्ति की प्राप्ति बतलाया गया है। यह मन्दिर एक छह फीट ऊँचे चौकोर चबूतरे पर बना हुआ है। मन्दिर में मुख्य भाग मण्डप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। बाहर प्रांगण में ‘नन्दी’ बैल वाहन के रूप में विराजमान हैं। मन्दिर का निर्माण किसने कराया इसका कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं मिलता है। लेकिन हाँ ऐसा भी कहा जाता है कि इसकी स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी।

‘मन्दिर की पूजा’ श्री केदारनाथ द्वादश ज्योतिर्लिगों में से एक माना जाता है। प्रातरूकाल में शिव-पिण्ड को प्राकृतिक रूप से स्नान कराकर उस पर घी-लेपन किया जाता है। तत्पश्चात धूप-दीप जलाकर आरती उतारी जाती है। इस समय यात्री-गण मंदिर में प्रवेश कर पूजन कर सकते हैं। लेकिन संध्या के समय भगवान का श्रृंगार किया जाता है। उन्हें विविध प्रकार के चित्ताकर्षक ढंग से सजाया जाता है। भक्तगण दूर से केवल इसका दर्शन ही कर सकते हैं। केदारनाथ के पुजारी मैसूर के जंगम ब्राह्मण ही होते हैं। केदारनाथ के निकट ही गाँधी सरोवर व वासुकीताल हैं। केदारनाथ पहुँचने के लिए, रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी होकर, 20 किलोमीटर आगे गौरीकुंड तक, मोटरमार्ग से जाना होता है। उससे आगे 14 किलोमीटर की यात्रा, मध्यम व तीव्र ढाल से होकर गुजरने वाले, पैदल मार्ग द्वारा करनी पड़ती है।