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खिर्सू (पौड़ी)

खिर्सू (पौड़ी)

उत्तराखण्ड के जनपद पौड़ी गढ़वाल में 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खिर्सू एक रमणीक पर्यटन गांव है। खिर्सू बांज, देवदार, चीड़, बुरांश के पेड़ों से भरे जंगल के बीच बसा छोटा सा गांव है। जहां शोर के नाम पर पक्षियों के कलरव और चहकने की आवाजें सुनाई देती हैं। ठीक इसके सामने नजर दौड़ाओं तो दिखते हैं बर्फ से ढके पहाड़ों की चोटियों की मनोरम श्रृंखला। यहां का मौसम ऐसा कि मई-जून में स्वेटर पहनने की नौबत पड़ सकती है। खिर्सू गांव में अन्य कई पर्यटन स्थलों की तरह चकाचौंध तो नहीं मिलेगी लेकिन यहां आकर ऐसा लगता है कि हम प्रकृति के बेहद करीब हैं। पौड़ी से खिर्सू महज 19 किमी. की दूरी पर स्थित है।

खिर्सू गांव जिसे उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पर्यटन स्थल का दर्जा दिया गया है। लेकिन पर्यटकों को लुभाने के लिये यहां खिर्सू में सब कुछ है जो प्रकृति की देन है। सुखद परिवेश, मनोरम वातावरण, दुर्लभ दृश्य, हरे-भरे वृक्ष, वनस्पति, परिंदों का कलरव और सकून भरा एकांत। यदि किसी तरह के विकास के लिये जंगलों या प्रकृति से छेड़छाड़ होती है तो खिर्सू का वर्तमान स्वरूप बिगड़ जायेगा। सैलानी यहां जंगल से गुजरते लगभग सुनसान सड़क पर पैदल चलकर आनंद ले सकते हैं। यहां से आप हिमालय की लगभग 300 ज्ञात और अज्ञात चोटियों को निहार सकते हैं। यहां पर इनके अलावा कुछ ऐसी जगह भी हैं जहां पर आप कुछ समय बिता सकते हैं। ऐसा ही एक स्थान है वन विहार का मनोरंजन केंद्र या पार्क।

इसी पार्क में पहले नेचर कैंप भी लगाया जाता था। इस तरह के कैंप पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करते हैं। खिर्सू से यदि ट्रैकिंग करनी है तो फिर काफी ऊंचाई पर स्थित फुरकंडा प्वाइंट है। यहां से खिर्सू और आसपास के गांवों का बहुत सुन्दर दृश्य दिखायी देता है। यहां अपनी गाड़ी से भी जा सकते हैं। घंडियाल मंदिर जो काफी मशहूर है इसी क्षेत्र में है। खिर्सू से लगभग तीन किमी दूर उल्कागढ़ी में उल्का देवी का मंदिर है। किसी समय गढ़वाल की राजधानी रही देवलगढ़ यहां से 16 किमी दूर है। खिर्सू से चौबट्टा तक जंगल के बीच दो किमी की सड़क जंगल के बीच गुजरती हैं। पर्यटक अक्सर यहां घूमने का आनंद उठाते हैं। खिर्सू और बुवाखाल के बीच पड़ने वाले कुछ स्थलों से बुरांश का जूस भी खरीदा जा सकता है। वर्षभर में यहां सैकड़ों की संख्या में पर्यटक घूमने आते हैं।