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पहाड़ का अनूठा फल – काफल

पहाड़ का अनूठा फल – काफल

काफल एक लोकप्रिय पहाड़ी फल है। उत्तराखण्ड के पर्वतीय जनपदों में इस फल के वृक्ष पाये जाते है। काफल पर्वतीय क्षेत्रों में पाये जाने वाला सदाबहार वृक्ष है। मई-जून में काफल के पेड़ पर स्वादिष्ट फल लगता है। काफल का पौधा 4000 फीट से 6000 फीट तक की ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। यह वृक्ष उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है। काफल का स्वाद खट्टा-मीठा मिश्रण होता है।

आयुर्वेद में काफल को भूख की अचूक दवा बताया गया है। इसके साथ ही मधुमेह (शूगर) रोगियों के लिए भी यह लाभदायक बताया गया है। आयुर्वेद विशेषज्ञ इसके फलों में एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों के होने की पुष्टि करते हैं। जिनसे शरीर में ऑक्सीडेंटिव तनाव कम होता है और दिल सहित कैंसर एवं स्ट्रोक के होने की संभावना कम हो जाती है। काफल की इतनी उपयोगिता के बावजूद भी बाहर के लोगों को खाने को नहीं मिलता है। दरअसल, काफल ज्यादा देर तक रखने पर खाने योग्य नहीं रहता। दिन की चटक धूप और गर्मी के कारण काफल मुरझा जाते हैं और शाम को ठंडी हवा लगते ही वह फिर ताजे हो जाते हैं। यही कारण है कि काफल खाने के लिए लोगों को देवभूमि उत्तराखण्ड ही आना पड़ता है।