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पवित्र गंगा नदी

पवित्र गंगा नदी

गंगा हिन्दूस्तान की सबसे पवित्र, आस्थापूर्ण एवं महत्त्वपूर्ण नदी है। इस पवित्र नदी को नवम्बर 2008 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय नदी घोषित कर दिया है। भागीरथी नदी गंगा की प्रमुख सहायक नदी है। भागीरथी नदी हिमालय उत्तराखण्ड, उत्तरकाशी जिले के गौमुख, गंगोत्री हिमनद से निकलती हैं। समुद्रतल से हिमनद गंगा के उद्गम स्थल की ऊँचाई 3140 मीटर है। गंगोत्री में मां गंगा जी का मंदिर है। इस गंगा मन्दिर में वर्षभर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। गंगा के आकार लेने में अनेक छोटी-छोटी धाराओं का योगदान है। जिन्हें गंगा के विभिन्न पर्याय नामों से जाना जाता है। इन नदियों का भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्त्व अधिक है।

गोमुख से निकलकर गंगा हरिद्वार से मैदानी क्षेत्र में पहुंचती है। हरिद्वार से लगभग 800 कि॰मी॰ मैदानी यात्रा करते हुए गढ़मुक्तेश्वर, कन्नौज, बिठूर, कानपुर होते हुए गंगा इलाहाबाद (प्रयाग) पहुँचती है। यहाँ इसका संगम यमुना नदी एवं सरस्वती नदी से होता है। यह संगम स्थल हिन्दुओं का एक महत्त्वपूर्ण तीर्थ है। यहीं कुंभ के आयोजन होते हैं। गंगा की उपासना माँ तथा देवी के रूप में की जाती है। गंगा नदी के प्रति विदेशी साहित्य में भी प्रशंसा और भावुकतापूर्ण वर्णन किये गये हैं। गंगा नदी भारत और बांग्लादेश में कुल मिलाकर 2,510 किलोमीटर की दूरी तय करती है। यह नदी हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी तक विशाल भू-भाग को सींचती है। गंगा नदी के ऊपर बने पुल, बांध और नदी परियोजनाएँ भारत की बिजली, पानी और कृषि से सम्बन्धित जरूरतों को पूरा करती हैं। इस नदी की यह विशेषता है कि इसके पानी में बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं, जो जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देते हैं।

उत्तराखण्ड में गंगा पर निर्मित टिहरी विकास परियोजना बांध है जो टिहरी जिले में स्थित है। यह बांध गंगा नदी की प्रमुख सहयोगी नदी भागीरथी पर बनाया गया है। वर्ष 2014 में ‘नमामि गंगे’ नामक एक परियोजना भारत सरकार द्वारा आरम्भ की गई है। गंगा जी के प्रति मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सारे पापों का नाश हो जाता है। धर्म शास्त्रों और आस्था के अनुसार भगीरथ भी अपने पुरखों को मोक्ष दिलाने के लिए गंगा को शिव की जटाओं से एक तप के बाद पृथ्वी पर ला पाए थे। आज भी इसके जल को पवित्र माना जाता है तथा समस्त संस्कारों में उसका होना आवश्यक है। पंचामृत में भी गंगाजल को एक अमृत माना गया है। गंगा नदी के तट पर बसे प्रमुख शहर हरिद्वार एवं इलाहाबाद में प्रत्येक 12 वर्ष बाद सबसे बड़ा मेला महाकुम्भ लगता है। जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश-विदेशों से पुण्य कमाने यहां आते है।