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उत्तरकाशी का माघ मेला

उत्तरकाशी का माघ मेला

उत्तराखण्ड राज्य की भौगोलिक संरचना पर ही यहां के तीज-त्योहार व रीति-रिवाज पूर्णतः आधारित है। उत्तरकाशी जनपद में सर्दियों के समय माघ मेला आयोजित किया जाता है। इस मेले को मनाने की परम्परा प्राचीन है। उत्तरकाशी माघ महोत्सव धार्मिक, सांस्कृतिक तथा व्यावसायिक मेले के रूप में प्रसिद्ध है। यह धार्मिक माघ महोत्सव प्रत्येक वर्ष मकर संक्राति के दिन उत्तरकाशी शहर में लगता है। स्थानीय गांव पाटा-संग्राली से कंडार देवता व अन्य देवी-देवताओं की डोलियों के उत्तरकाशी पहुंचने पर इनका भव्य स्वागत किया जाता है। मेले में पर्वतीय क्षेत्रों के दूर-दराज से आये श्रद्धालु यहां गंगा स्नान कर पुण्य कमाते हैं। उत्तरकाशी के पर्वतीय क्षेत्रों के लोग इस मेले में हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रचार-प्रसार व विक्रय के लिए लाते हैं। कुछ समय पहले यहां मेले में स्थानीय जड़ी-बूटियों को भी उपचार के लिए लाया करते थे परन्तु सरकार ने इस पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। अब मेले में मात्र ऊनी वस्त्रों का ही विक्रय किया जाता है।

उत्तरकाशी माघ मेले का महत्व धार्मिकता के आधार पर अन्य प्रदेशों तक अपनी पहचान एवं आस्था बना चुका है। वर्तमान समय में यह मेला धार्मिक, सांस्कृतिक एवं विकास मेले के अतिरिक्त पर्यटक मेले के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। इसका मुख्य कारण वर्तमान में पर्यटक स्थलों के विकास एवं प्रचार-प्रसार की मुख्य भूमिका रही है। यह मेला जनवरी माह में आयोजित होता है जिसके कारण उस समय पहाड़ों में अत्यधिक ठण्ड व बर्फ रहती है। यहां के दयारा बुग्याल को स्कीइंग सेंटर के रूप में विकसित करने के कारण क्षेत्र में काफी पर्यटकों का आवागमन होता है। उत्तरकाशी एक पहाड़ी जिला है, यहां जाने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश 145 किमी॰ की दूरी पर है। वहीं इसके निकटतम हवाई अड्डा जौलीग्रांट 162 किमी॰ दूरी पर स्थित है। बसें और टैक्सी आदि यहां प्रत्येक जिलों से चलती रहती हैं।