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अपना गढ़वाल

देवभूमि गढ़वाल- यह पवित्र-पावन भूमि है। जहाँ देवी-देवताओं का वास है। ऋषियों-मुनियों की यह तपो भूमि है, जहाँ कदम-कदम पर मठ, मंदिर और धाम हैं। वेद-पुराण व सनातन कथाओं में जिनकी असंख्य कथाएँ हैं। हाँ, ऐसी है हमारी धरती, जहाँ देश-दुनिया से श्रद्धालु, तीर्थयात्री आते हैं। अपनी-अपनी मनोकामनाएं लेकर। श्रद्धा व भक्तिभाव से ओत-प्रोत होकर। भला ऐसी भूमि पर कोई क्यों न गर्व करे?
क्यों न हम इसे दुनिया को दिखाएं, बताएं। इस देवभूमि का गुणगान गाएं?



प्रकृति का वरदान

हिमालय की गोद में स्थित प्रकृति की दुर्लभ भेंट। नदियाँ, पर्वत, बर्फ, घाटियां, ग्लेशियर, झरने, चश्मे... और बहुत कुछ। छोटे-बड़े, फलाहारी, उपयोगी और गगनचुम्बी वृक्ष। वनस्पति, फल-फूल, औषधियों से सम्पन्न, समृद्ध मनोरम गढ़वाल। नयनाभिराम दृश्य, बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों से झाँकता स्वर्णिम सूर्य। फूलों की घाटी, हरे-भरे खेत, तरह-तरह के जीव-जन्तु, पशु-पक्षी। खुला आकाश, स्वस्थ वातावरण। महकती हवाएं, विहंगम दृश्य। सबको अपना बनाएं।
फिर हम क्यों ना इन पर गर्व जताएं। दुनिया को दिखाएं, पर्यटकों को बुलाएं... अपने आथित्य और कला-संस्कृति को दूर-दूर तक पहुँचाएं।



यह शौर्य भूमि है

यह बहादुरों की धरती है। जहाँ शौर्य, पराक्रम और साहस रग-रग में बसता है, घर-घर में बसता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी, अनंत काल से। इतिहास के पन्नों को लें या आज की भारतीय सेना अथवा अन्य सुरक्षा बलों को। उत्तराखंड और विशेषकर गढ़वाल के वीरों के बिना इनकी कल्पना करके तो देखिए? ...अतिश्योक्ति नहीं है, यह सच्चाई है। इस वीर-बहादुरों की जननी-जन्म भूमि की। जहाँ बसता है शौर्य भुजाओं में, घर-घर से जुड़ी कथाओं में।
अब ऐसी वीर भूमि को कोई क्यों ना नमन करे। कोई क्यों ना स्मरण करे। क्यों ना गर्व से सीना फुलाए, जग को बताए?



बुलाएं... अनंत संभावनाएं!

उद्योग, पर्यटन, सुख-समृद्धि की अनंत संभावनाएं लिए एक युवा राज्य का अभिन्न अंग... निरंतर आगे बढ़ता। शिक्षित युवा, उद्यमशील व मेहनतकश महिलाएं, विकासशील समाज। प्रचुर मात्रा में संसाधन समेटे। कृषि, पशु-पालन, औषधीय, फूड प्रोसेसिंग, हस्त शिल्प, कुटीर उद्योग तथा अन्य सैकड़ों उद्योंगों के लिए बेहद उपयुक्त परिवेश। व्यवसाय सहयोगी नीतियाँ, अनुदान, समर्थन। गढ़वाल और उत्तराखंड आने वाले निवेशकों के लिए बाहें फैलाए खड़ा है।


फिर क्यों ना हम स्वरोजगार बढ़ाएं। छोटे-बड़े उद्योग लगाएं। लोगों को बताएं, बुलाएं, प्रेरित करें। यहां आकर रोजगार के अवसर बढ़ाने को, आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए, लोगों और समाज को शिक्षित, प्रशिक्षित करने को। यहाँ रोजी-रोटी के नए-नए अवसर जुटाने को। ताकि हमारे बच्चों, युवाओं, श्रमिकों, कृषकों सबको एक सुखद भविष्य का वातावरण मिले। क्यों न हम यह बात सबको बताएं! सबको सुनाएं? खुद भी सक्षम बने औरों को भी सक्षम बनाएं।